जवानों के कल्याण के लिए कदमो पर देरी से सवाल

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उच्च स्तर पर तय मुद्दों पर अमल में सुस्ती

1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के 50 साल आज पूरे हो गए हैं. ये वही युद्ध था जिसके नतीजे में दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश नाम के नए राष्ट्र का उदय हुआ. इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को छठी का दूध याद दिला दिया था

राष्ट्रीय समर स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के बाद 4 स्वर्णिम विजय मशाल प्रज्जवलित किए. इन मशालों को देश के अलग अलग कोनों में ले जाया जाएगा।

मगर जवानों की जिंदगी को लेकर इतना लापरवाह क्यों है।

विभिन्न सुरक्षा बलों में जवानों के कल्याण से जुड़े कई सुझावों पर अमल में देरी होने से सवाल उठ रहे हैं। जवानों को सौ दिन अवकाश,उनके घर के समीप पोस्टिंग,एक निश्चित आयु के बाद डेपुटेशन वाली जगहों पर भेजने से जुड़े प्रस्ताव अभी भी ठंडे बस्ते में हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इन सभी सुझावों पर बीते एक साल में कई बार चर्चा हुई है। लेकिन अभी इनपर अमल नही हो पाया है।
सूत्रों ने कहा एक सुझाव उच्च स्तर पर सामने आया था कि कठिन ड्यूटी में जीवन बिताने वाले जवानों के लिए साल में सौ दिन छुट्टी का इंतजाम किया जाए। जिससे वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकें। इस सुझाव को जवानों पर बढ़ रहे दबाव और उनकी मनः स्थिति ठीक रखने के लिहाज से काफी अच्छा माना गया था। सूत्रों ने कहा, उच्च स्तर पर सहमति के बावजूद जवानों की कम संख्या और अतिरिक्त बटालियन की कमी का हवाला देते हुए अंदरूनी स्तर पर अफसरों ने इसे आगे नही बढ़ाया।

इसी तरह एक ठोस सुझाव ये भी था कि आईटीबीपी, बीएसएफ आदि फोर्स में कठोर ड्यूटी में रहने वाले जवानों को 40 साल तक की उम्र तक काम करने के बाद डेपुटेशन से जुड़ी पोस्टिंग सीआईएसएफ,एनआईए या अन्य जगहों पर दी जाए लेकिन यह मसौदा भी आगे नही बढ़ पाया। इसी तरह घर के पास पोस्टिंग देने के सुझाव को भी अमलीजामा नही पहनाया जा सका है।
सूत्रों ने कहा जवानों के कल्याण से जुड़े प्रस्तावों के अलावा एक सुझाव यह भी था कि ऐसे अफसरों और जवानों को जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं फोर्स से बाहर करने के लिए अभियान चलाया जाए लेकिन इसे भी अभी गति नही मिल पाई है।

सूत्रों ने कहा इन सुझावों पर गृहमंत्रालय काफी गंभीर रहा है। आने वाले दिनों में संबंधित बलों से इन मामलों पर रिपोर्ट भी ली जा सकती है क्योंकि ये सभी मुद्दे उच्चस्तरीय बैठकों में सामने आए थे।
फिलहाल जवानों की ओर से कन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री वेलफेयर एसोशिएशन का दबाव बना हुआ है। सभी सुझावों पर जल्द अमल की मांग की जा रही है।